बुत
बामियान से
बेलोनिया तक
तोड़े गए
पर ख़ामोश रहे
बुद्ध और लेनिन
बाकी बुत भी
भगत सिंह भी
गांधी भी
बुत बोलते नहीं
चुपचाप देखते हैं
बरबादी का कारवां
अपनी और विचारों की
टूट जाता है सब
वक्त के साथ साथ
बिखर जाता है
बरबाद होती है बुनियाद
सब कुछ टूटने
और बिखरने पर भी
जो चुप रहते हैं
वो बन जाते हैं
बुत
बामियान से बेलोनिया तक
गगन
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