Sunday, April 8, 2018

माफ़ी

किसी ने गुफ़ा में दी
तो पहुंचा सलाखों के पीछे
किसी ने हलफनामे देकर मांगी
तो पहुंचा सवालों के नीचे
माफ़ी देने वाला
माफ़ी मांगने वाला
दोनों बराबर के कसूरवार
कहीं उसकी सरकार
कहीं इसकी सरकार
पर भूल गए हैं दोनों
कि जब लगे उसकी अदालत
तो ना माफ़ी चलेगी
ना दलील की दरकार
वहां रहती है बराबर
इंसाफ़ की तराजू
और पड़ती उसकी लाठी
जो होती है बे-आवाज़

गगन

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