किसी ने गुफ़ा में दी
तो पहुंचा सलाखों के पीछे
किसी ने हलफनामे देकर मांगी
तो पहुंचा सवालों के नीचे
माफ़ी देने वाला
माफ़ी मांगने वाला
दोनों बराबर के कसूरवार
कहीं उसकी सरकार
कहीं इसकी सरकार
पर भूल गए हैं दोनों
कि जब लगे उसकी अदालत
तो ना माफ़ी चलेगी
ना दलील की दरकार
वहां रहती है बराबर
इंसाफ़ की तराजू
और पड़ती उसकी लाठी
जो होती है बे-आवाज़
गगन
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