ये तो बस शुरुआत है
खाकी हर जगह खड़ी
पेल रही है लट्ठ
लाइब्रेरी को बता रही
गुंडों का जमघट
जिसके इशारे पे चले खाकी
क्या ये उसकी बिसात है
डरने की ही बात है
ये तो बस शुरुआत है
आलू को कोई पूछे ना
राजा बन गया प्याज़
ज़िम्मेदार बोलें जब भी
तो करें कोढ़ में खाज
मुद्दा बना है देश में
कौन किस के साथ है
डरने की ही बात है
ये तो बस शुरुआत है
कहते अर्थ ले जाएंगे
पांच ट्रिलियन के पार
आबादी जो करोड़ों है
कुछ तो दो रोज़गार
अच्छे दिन हैं लापता
अभी तो काली रात है
डरने की ही बात है
ये तो बस शुरुआत है
जनता मूरख नहीं है
ग़लतफहमी ना पालो
तानाशाही नहीं चलेगी
लोकतंत्र को बचा लो
ऐसा ना हो अबकी बार
कोई ना कहे हम साथ हैं
तुम्हारे डरने की भी बात है
ये तो बस शुरुआत है
गगन