Friday, September 7, 2018

दोहे

बने सियासत सारथी, कैसे कैसे लोग
देश मर रहा भूक से, उनके छप्पन भोग

बेशर्मी मरी शर्म से, सुनकर उनकी बात
कोटि बार बोलें असत्य, सत्य नहीं बन पात

वे बोलें तो दिवस कह, कह दें तो कह रात
देशभक्त ना बन सके जो राजभक्त बन जात

शब्द सुदर्शन चल गया, अब भक्त होंगे परेशान
त्राहिमाम करती धरा, हुए खत्म विधि विधान

झूठी पोथी बांच के, लई सरकार बनाय
राजा मन की बक रहा, बहरा हुआ समुदाय

बिन गृहस्थी के जो जिया, क्या जाने परिवार
वानप्रस्थ के काल में, राजा सजाए दरबार

पूरे जीवन जो ना चला, कभी भी सीधी राह
अनुशासन की बात करे, कैसे वो तानाशाह

गगन