Thursday, July 20, 2023

जंगल

ओ  इंसानों
ढूंढ लो अपने लिए
कहीं और, धरती नई
यहाँ जंगल राज है
यहाँ का राजा शेर है
आम बात है जिसके लिए 
हिरणियों, भेड़ों और मेमनों का शिकार
उसकी सेना भी
हिंसक, वहशी और जंगली
निरी आदमखोर
जिस तस्वीर ने
विचलित कर दिया तुम्हे
शेर की गुफा में
भरी पड़ी हैं 
ऐसी तस्वीरों की एल्बम
जिन्हें खोल लेता है
गाहे-बगाहे सेना के सामने
भर देता है नफरत
ज़हन- ओ- दिल में
कल ही की तो बात है
जंगल के कंटीले दरख़्त की
सबसे ऊंची डाल के सिरे पर
टांग दिया था
नन्हें खरगोश शावक का शरीर
जिसे मादा शावक की
कोख से चीर लाए थे भेड़िये
भूल गए होगे तुम 
इंसानी फितरत के शिकार
ज्यादा याद नहीं रहता तुम्हे
शेर के हृदय में
पीड़ा है आज क्यों कि
इंसानों के सामने
नग्न हो गई है
उसकी असलियत
क्रोध है क्योंकि
जुबान वाले हैं इंसान
उसकी जूठन में बची
बोटियां चाटने के लिए
जीभ लपलपाते, हुआ हुआ करते
रंगे सियारों जैसे गूंगे नहीं
ओ इंसानों
ढूँढ लो धरती कहीं
जंगलराज में बस
शेर है राजा

गगन