कलम
खुद नहीं चलती
उसे हाथ चलाते हैं...
शब्द खुद से उभरते नहीं,
उन्हें सोच जन्म देती है...
सवाल सिर्फ प्रश्न चिह्न नहीं होते...
वो सच दिखाता आईना होते हैं
आईने पत्थरों से टूट जाते हैं
सवाल रबड़ से मिटाए जा सकते हैं
हाथ कट सकते हैं
इस वक्त की ब्लू व्हेल का निशान लेकर
कलम तोड़ी जा सकती है
जुल्म से.... ज़बर से...
पर
सोच का क्या करोगे ???????
खुद नहीं चलती
उसे हाथ चलाते हैं...
शब्द खुद से उभरते नहीं,
उन्हें सोच जन्म देती है...
सवाल सिर्फ प्रश्न चिह्न नहीं होते...
वो सच दिखाता आईना होते हैं
आईने पत्थरों से टूट जाते हैं
सवाल रबड़ से मिटाए जा सकते हैं
हाथ कट सकते हैं
इस वक्त की ब्लू व्हेल का निशान लेकर
कलम तोड़ी जा सकती है
जुल्म से.... ज़बर से...
पर
सोच का क्या करोगे ???????
- 'गगन'