Tuesday, February 14, 2012

कुछ दिन पहले

फिर से बारिश की एक बू्ंद
गुलाब की पत्ती से
घास की नोक तक
गिरते गिरते बची
और
खुशबू ने फिर
हवाओं से कर दिया
प्यार का इज़हार.....

Friday, February 10, 2012

शहर

वो
मर गए और किसी को खबर ना हुई
लोग शोरो गुल में खामोश थे
डिस्क मे म्यूज़िक तेज़ था.....

Tuesday, February 7, 2012

एक बार फिर

कोरे काग़ज़ वाले ख़त अब कहाँ मिलते हैं
बिना कलम और स्याही के जो लिखते थे हम तुम
ऐसे अक्षर शब्दकोष में कहां दिखते हैं
शब्दों की मंडी है, कीमतें बढी हुई हैं
बिन बारिश मुसकाएं, फूल वो कहां खिलते हैं