अ सुबह...
ज़रा ख़ामोशी से देख...
वो गेसुओं की काली बदलियां
उन बदलियों मे मेरा चाँद है
पाक़ साफ मुहब्बत से भरपूर
वो पूर्णिमा की चमक लिए
मेरा प्यार है
हवाओं...!
तुम उसकी ज़ुल्फ़ें मत हिला देना
इन बदलियों को इस चाँद पे रहने दो
ये इसे मेरी नज़रों से बचाती हैं...
पर इन्हें मालूम नहीं
दिल में जब यार की तस्वीर बस जाए
तो फिर कहाँ किसी ओर नज़र जाती है
अभी मेरे चाँद ने आंखें नहीं खोली
वो जानता है कि उसके पास है
मय का दरिया
उसे मालूम है कि
मैं प्यासा हूँ जन्मों का
अ' चाँद जब जाग जाओ
तो कुदरत प' अपना करम करने के बाद
इस रुत को प्यारी सी नज़र से देखकर
फिर एक बार मेरी ओर चेहरा घुमा लेना
मेरे शहर में जुदाई की गर्मी है
इसे अपने अक्स से ठंडी सी हवा देना
मैं इंतज़ार करूंगा तेरे जागने का
उस के बाद ही इबादत मेरी शुरू होती है
गगन
Tuesday, June 12, 2018
चंदा
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