Sunday, April 15, 2018

कुछ देखना बाकी नहीं

मेरे देश की आज नई तस्वीर देख लो
कुंद हुई इंसाफ की सब शमशीर देख लो

इंसानियत सरे बाज़ार हुई तार तार है
नरभक्षियों के हक में खड़ी ये भीड़ देख लो

राम के भक्त, रहीम के बन्दे परेशान हैं
धर्म की किसने की बदरंग तस्वीर देख लो

अबके कोयल सावन रुत ना कूकें शायद
भेड़ियों ने सब तोड़ ली हैं जंज़ीर देख लो

पानी में मिला लहू और खून हो गया पानी
भाईचारा नफरत ने किया तक़्सीम देख लो

ये मेरा वो तेरा हर तरफ आग लगी है
भूल गए सब गंगा जमुनी तहजीब देख लो

बातचीत के जो भी ज़रिए थे सब उसके थे
फिर उसने खींची खामोशी की लकीर देख लो

मुंसिफ कैसे मुफलिस की फरियाद सुनेगा
खड़े कटहरे में राजा और वज़ीर देख लो

किस से जाकर कहें 'गगन' इंसाफ दिला दो
क़ातिलों से मिल गए मेरे ये वकील देख लो

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