वक्त इंसान की फितरत बदल देता है
हुस्न ईमान की नीयत बदल देता है
ना कोई आम, ना ख़ास इसके सामने
भगवान की भी किस्मत बदल देता है
जिनके लिए कल तक मैं खाक ना था
उनकी नज़रों में इज़्ज़त बदल देता है
खुशामद और प्यार में है फर्क इतना
कहे अलफ़ाज़ के अर्थ बदल देता है
धूप और छांव का खेल ये ज़िन्दगी
हवा का झोंका मौसम बदल देता है
गगन चूमने को बेताब कई इमारतें
ज़लज़ला आके सूरत बदल देता है
गगन
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