Sunday, April 8, 2018

अच्छे दिन

पिलाकर चाय बेस्वाद नींद देश की उड़ाई
पकौड़ा बेचने को फिर रोज़गार बता गए
पुराने सब खतम सारे नए नए नोट थे
उनके प्यारे आ के सीधे बैंक से उड़ा गए
साहेब गर्व से कहते हैं अच्छे दिन आ गए
मोहब्बत की निशानी योगी के हाथ में
गृह-त्यागी चले लिए भोगी को साथ में
देश सुनता था जिसे अलग ही जज़्बात में
मन की बात कर के सारे किस्से मिटा गए
साहेब गर्व से कहते हैं अच्छे दिन आ गए
-गगन



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