सदभावना से जुड़े कितने ही ऐसे किस्से हैं... कहानियां हैं... प्रेरक प्रसंग हैं जो आपको पढने या सुनने को मिल जाएंगे...। दो आपसे साझे करता हूं...
1.
एक सच्ची घटना जो श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के जीवन काल से जुड़ी है उसमें भाई कन्हैया जी का ज़िक्र है... भाई कन्हैया जी जिन की गुरु महाराज के कुछ दरबारियों ने शिकायत की कि वो दुश्मन के ज़ख्मी सैनिकों को भी पानी पिलाता है... गुरु महाराज ने भाई कन्हैया को बुलाया, पूछा... भाई कन्हैया ने नम्रता से उत्तर दिया.. गुरु महाराज ! मुझे तो सब जगह आपका ही नूर नज़र आता है... कौन अपना और कौन दुश्मन... ये पता ही नहीं चलता... गुरु महाराज ने भाई कन्हैया को मल्हम दिया और कहा भाई कन्हैया अब से सिर्फ पानी मत पिलाना... मल्हम भी लगाना...। ये भाई कन्हैया की सदभावना की पराकाष्ठा थी...
2.
एक कहानी जो कई बार किताबों में पढी है... एक साधु महाराज नदी के किनारे बैठे थे... एक बिच्छू को पानी में डूबने से बचाने की कोशिश कर रहे थे... बिच्छू बार-बार डंक मारता... साधू महाराज बार बार बचाते...। एक राहगीर ने पूछा.. महाराज आप क्यूं बार बार बिच्छू से डंक खा रहे हैं...। साधु ने बहुत खूबसूरत जवाब दिया... बिच्छू का स्वभाव है डंक मारना... मेरा स्वभाव है बचाना...। वो अपना स्वभाव नहीं छोड़ता तो मैं अपना स्वभाव भला कैसे छोड़ दूं...। ये सदभावना है।
अब बात पंजाब की... बठिंडा में 23 नवंबर को एक बड़े ग्राउंड में आयोजित सदभावना रैली में शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के तमाम बड़े चेहरे मंच पर थे और मंच के सामने थे बड़ी तादाद में लोग (जो खुद आए.. या बुलाए गए... या लाए गए...)। रैली में सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा, बीबी जागीर कौर, केंद्रीय राज्यमंत्री विजय सांपला, डीएसजीएमसी के प्रधान मनजीत सिंह जीके, अकाली दल से राज्यसभा सांसद बलविंदर सिंह भूंदड़, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल, पंजाब बीजेपी अध्यक्ष कमल शर्मा, राज्य के उपमुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और आखिर में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने अपने विचार लोगों के सामने रखे। ये तमाम वक्ता अपनी अपनी पार्टियों के चेहरे हैं... राजनीति के माहिर हैं... पर क्या सदभावना रैली के मंच से वो संदेश दिया जा सका जो शीर्षक के तौर पर सामने रखा गया था... घूम फिर कर तकरीबन तमाम नेताओं के संबोधन में ज़्यादातर ज़ोर विरोधियों को कोसने और पंजाब के लोगों को आने वाले वक्त में सावधान रहने की चेतावनी देने पर था... हैरानी तब हुई जब राज्य के उप मुख्यमंत्री ने अपनी तकरीर खत्म होने के बाद एक बार फिर वापिस आकर एक नया स्लोगन दिया पंजाब में 2017 में किसकी सरकार.... शिरोमणि अकाली दल बीजेपी की...। सदभावना के नाम पर हुई रैली से दिया गया ये संदेश किस तरह की सदभावना पंजाब के आवाम में लाएगा... इस पर विचार किए जाने की ज़रूरत है। पंजाब जिस दौर से गुज़र रहा है उस पर चिंता होना स्वभाविक है। पर अगर इस तरह के शक्ति प्रदर्शन या आपस में इल्ज़ामबाज़ी के दौर की बजाय अगर तमाम राजनेता आपस में मिलकर पंजाब की बेहतरी की अपील लोगों से करें... (जो फिल्हाल तो next to impossible जैसा है) तो क्या ज़्यादा बेहतर ना होगा... पर शायद राजनेताओं में, पार्टियों में और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं में ये विचार शायद ना ही आ पाए...। पंजाब को क्या चाहिए... क्या ये तमाम पार्टियों (शिअद, बीजेपी, कांग्रेस, एएपी और बाकी) के नेता तब समझेंगे जब जनता 2017 में समझाएगी... कृप्या खुद संभलिए और पंजाब को संभालिए... कड़वाहट की राजनीति से हटकर विकासपरक राजनीति की बात कीजिए...
@kanwargagan
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एक सच्ची घटना जो श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के जीवन काल से जुड़ी है उसमें भाई कन्हैया जी का ज़िक्र है... भाई कन्हैया जी जिन की गुरु महाराज के कुछ दरबारियों ने शिकायत की कि वो दुश्मन के ज़ख्मी सैनिकों को भी पानी पिलाता है... गुरु महाराज ने भाई कन्हैया को बुलाया, पूछा... भाई कन्हैया ने नम्रता से उत्तर दिया.. गुरु महाराज ! मुझे तो सब जगह आपका ही नूर नज़र आता है... कौन अपना और कौन दुश्मन... ये पता ही नहीं चलता... गुरु महाराज ने भाई कन्हैया को मल्हम दिया और कहा भाई कन्हैया अब से सिर्फ पानी मत पिलाना... मल्हम भी लगाना...। ये भाई कन्हैया की सदभावना की पराकाष्ठा थी...
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एक कहानी जो कई बार किताबों में पढी है... एक साधु महाराज नदी के किनारे बैठे थे... एक बिच्छू को पानी में डूबने से बचाने की कोशिश कर रहे थे... बिच्छू बार-बार डंक मारता... साधू महाराज बार बार बचाते...। एक राहगीर ने पूछा.. महाराज आप क्यूं बार बार बिच्छू से डंक खा रहे हैं...। साधु ने बहुत खूबसूरत जवाब दिया... बिच्छू का स्वभाव है डंक मारना... मेरा स्वभाव है बचाना...। वो अपना स्वभाव नहीं छोड़ता तो मैं अपना स्वभाव भला कैसे छोड़ दूं...। ये सदभावना है।
अब बात पंजाब की... बठिंडा में 23 नवंबर को एक बड़े ग्राउंड में आयोजित सदभावना रैली में शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के तमाम बड़े चेहरे मंच पर थे और मंच के सामने थे बड़ी तादाद में लोग (जो खुद आए.. या बुलाए गए... या लाए गए...)। रैली में सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा, बीबी जागीर कौर, केंद्रीय राज्यमंत्री विजय सांपला, डीएसजीएमसी के प्रधान मनजीत सिंह जीके, अकाली दल से राज्यसभा सांसद बलविंदर सिंह भूंदड़, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल, पंजाब बीजेपी अध्यक्ष कमल शर्मा, राज्य के उपमुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और आखिर में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने अपने विचार लोगों के सामने रखे। ये तमाम वक्ता अपनी अपनी पार्टियों के चेहरे हैं... राजनीति के माहिर हैं... पर क्या सदभावना रैली के मंच से वो संदेश दिया जा सका जो शीर्षक के तौर पर सामने रखा गया था... घूम फिर कर तकरीबन तमाम नेताओं के संबोधन में ज़्यादातर ज़ोर विरोधियों को कोसने और पंजाब के लोगों को आने वाले वक्त में सावधान रहने की चेतावनी देने पर था... हैरानी तब हुई जब राज्य के उप मुख्यमंत्री ने अपनी तकरीर खत्म होने के बाद एक बार फिर वापिस आकर एक नया स्लोगन दिया पंजाब में 2017 में किसकी सरकार.... शिरोमणि अकाली दल बीजेपी की...। सदभावना के नाम पर हुई रैली से दिया गया ये संदेश किस तरह की सदभावना पंजाब के आवाम में लाएगा... इस पर विचार किए जाने की ज़रूरत है। पंजाब जिस दौर से गुज़र रहा है उस पर चिंता होना स्वभाविक है। पर अगर इस तरह के शक्ति प्रदर्शन या आपस में इल्ज़ामबाज़ी के दौर की बजाय अगर तमाम राजनेता आपस में मिलकर पंजाब की बेहतरी की अपील लोगों से करें... (जो फिल्हाल तो next to impossible जैसा है) तो क्या ज़्यादा बेहतर ना होगा... पर शायद राजनेताओं में, पार्टियों में और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं में ये विचार शायद ना ही आ पाए...। पंजाब को क्या चाहिए... क्या ये तमाम पार्टियों (शिअद, बीजेपी, कांग्रेस, एएपी और बाकी) के नेता तब समझेंगे जब जनता 2017 में समझाएगी... कृप्या खुद संभलिए और पंजाब को संभालिए... कड़वाहट की राजनीति से हटकर विकासपरक राजनीति की बात कीजिए...
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