अक्तूबर 2014 में हरियाणा में चुनावी सीज़न पूरे ज़ोरों पर था... वोटों की फसल काटने की तैयारी में तमाम दलों ने आस्तीने चढाई हुई थी... ZPHH की तरफ से मुझे अपने सहयोगी और दोस्त रोहित खन्ना के साथ तकरीबन 11-12 लोगों की एक टीम लेकर हरियाणा के 5 अलग अलग शहरों में ग्राउंड इवेंट के ज़रिए लोगों का मूड जानने की ज़िम्मेदारी मिली थी... सिरसा... करनाल... रेवाड़ी होते हुए हम लोग हिसार पहुंचे...। शिवम से मैं हिसार में ढंग से पहली बार मिला...। इससे पहले फोन पर कुछ एक प्रोग्राम्स को लेकर बात होती रहती थी...कई एक बार लाईव चैट भी बुलेटिन्स के दौरान हुई... पर स्क्रीन की दुनिया से बाहर रियल लाईफ में आमने सामने मुलाकात का ये पहला मौका था...। पहली मुलाकात में ही जिस बात ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया वो थी शिवम की सरलता.. उस पहली मुलाकात में सहकर्मी से दोस्त बन गया था शिवम.... एक बात का यकीन तो हमेशा से था कि शिवम ऐसा शख्स है जो किसी भी वक्त किसी काम को मना नहीं करेगा... पत्रकारिता में फील्ड में काम करने वाले लोगों के लिए वैसे तो वक्त की कोई सीमा नहीं होती... पर इस असीमितता को भी शिवम ने बौना साबित कर दिया था... आप किसी भी वक्त कॉल करके कह रहे हैं... शिवम यार ये काम करना है... देख ले... हो जाएगा... हमेशा यही जवाब मिला... कोई शिकवा नहीं... एक्सक्यूज़ नहीं... यही वजह थी कि शिवम लगातार तेज़ी से आगे बढता नज़र आ रहा था... बरवाला में रामपाल का मामला भड़का तो कुलवीर और रोहित के साथ शिवम भी मोर्चे पर डटा... हमारी कई दिन की मेहनत पर आखिरी स्टैंप.. ब्रेकिंग के ज़रिए शिवम ने लगाई... रामपाल गिरफ्तार हो गया... बाद में देर रात ई मेल भी किया... फाइनल इनपुट... बाइ शिवम... और ये फाइनल इनपुट ही बन गया... मुझे अब भी याद है.. रामपाल मामले में लगातार डिस्कशन और बुलेटिन्स के बाद मैं देर रात ही घर आया था...सुबह उठा तो आदतन सबसे पहले फोन चैक किया... RIP... RIP... कई मैसेज थे... व्हाट्सएप चैक किया तो यकीन नहीं हुआ... Shivam sannu chhadd gaya.... नवल सर का मैसेज था... कब कहां कैसे... कितने सारे सवाल थे... एक रात का फासला क्या इतना बड़ा हो सकता है कि एक दोस्त हमेशा के लिए जुदा हो जाए... समझ नहीं आ रहा था कि कैसे... नवल सर को फोन किया... सर की आवाज़ भर्राई हुई थी... सिर्फ इतना ही समझ आया कि कैथल के पास एक्सीडेंट हुआ... कैथल के पास... मेरे शहर के पास... ऐसे कैसे... बहुत से सवाल थे जो ज़हन में थे... कैथल में पत्रकार दोस्त जोगिंदर कुंडू से बात हुई.... वो सिविल अस्पताल में थे... घर पर फोन मिलाया... बड़े भाई से बात हुई... उन्हें वही सब बताया जो मुझे पता था... शिवम के साथ जुड़ी तमाम बाते ज़हन में घूम रही थी... आज भी वैसे ही याद हैं... अपने तकरीबन 9 साल के करियर में बहुत सी हस्तियों का अंतिम संस्कार हमने अपने दर्शकों को दिखाया... पर शिवम... मुझे बार बार कमांड मिल रही थी कि मैं कुछ बोलूं... कुछ कहूं.... पर अंदर बहुत कुछ टूट चुका था... उस दिन मैने एक ही दुआ ऑन स्क्रीन की थी.. कि इस तरह से किसी ओर को कभी भी दुबारा किसी अपने की मौत पर कुछ कहना ना पड़े... मेरे पास शब्द नहीं थे... सिर्फ भावनाएं थी... शिवम के साथ जुड़ी यादें थी.... उसकी मुस्कुराहट थी... हादसे के कुछ दिन बाद घर जाना हुआ तो एक ही बात ज़हन में थी... एक बार शिवम के घर जाना है... बड़े भईया और मैं हम दोनों गए... वहां जाकर मुझे पहली बार ये पता लगा कि शिवम इंजीनियरिंग स्टूडेंट था... एक बेहतरीन कलाकार था... अपने आस पड़ोस में सबका चहेता था... चंडीगढ़ में शिवम के घर से मैं और भईया वापिस आ गए... एक साल बीत गया है... पर उस घर और शिवम के चाहने वाले तमाम लोगों के ज़हन में उसके जाने से पैदा हुई खला अभी भी जस की तस है.. शायद कभी कम भी ना होगी... उसकी यादें... बातें... अंदाज़... हमेशा साथ रहेंगे... वो जहां भी है... मुस्कुराता रहे... RIP शिवम !
Thursday, November 19, 2015
शिवम : एक साल पहले...
अक्तूबर 2014 में हरियाणा में चुनावी सीज़न पूरे ज़ोरों पर था... वोटों की फसल काटने की तैयारी में तमाम दलों ने आस्तीने चढाई हुई थी... ZPHH की तरफ से मुझे अपने सहयोगी और दोस्त रोहित खन्ना के साथ तकरीबन 11-12 लोगों की एक टीम लेकर हरियाणा के 5 अलग अलग शहरों में ग्राउंड इवेंट के ज़रिए लोगों का मूड जानने की ज़िम्मेदारी मिली थी... सिरसा... करनाल... रेवाड़ी होते हुए हम लोग हिसार पहुंचे...। शिवम से मैं हिसार में ढंग से पहली बार मिला...। इससे पहले फोन पर कुछ एक प्रोग्राम्स को लेकर बात होती रहती थी...कई एक बार लाईव चैट भी बुलेटिन्स के दौरान हुई... पर स्क्रीन की दुनिया से बाहर रियल लाईफ में आमने सामने मुलाकात का ये पहला मौका था...। पहली मुलाकात में ही जिस बात ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया वो थी शिवम की सरलता.. उस पहली मुलाकात में सहकर्मी से दोस्त बन गया था शिवम.... एक बात का यकीन तो हमेशा से था कि शिवम ऐसा शख्स है जो किसी भी वक्त किसी काम को मना नहीं करेगा... पत्रकारिता में फील्ड में काम करने वाले लोगों के लिए वैसे तो वक्त की कोई सीमा नहीं होती... पर इस असीमितता को भी शिवम ने बौना साबित कर दिया था... आप किसी भी वक्त कॉल करके कह रहे हैं... शिवम यार ये काम करना है... देख ले... हो जाएगा... हमेशा यही जवाब मिला... कोई शिकवा नहीं... एक्सक्यूज़ नहीं... यही वजह थी कि शिवम लगातार तेज़ी से आगे बढता नज़र आ रहा था... बरवाला में रामपाल का मामला भड़का तो कुलवीर और रोहित के साथ शिवम भी मोर्चे पर डटा... हमारी कई दिन की मेहनत पर आखिरी स्टैंप.. ब्रेकिंग के ज़रिए शिवम ने लगाई... रामपाल गिरफ्तार हो गया... बाद में देर रात ई मेल भी किया... फाइनल इनपुट... बाइ शिवम... और ये फाइनल इनपुट ही बन गया... मुझे अब भी याद है.. रामपाल मामले में लगातार डिस्कशन और बुलेटिन्स के बाद मैं देर रात ही घर आया था...सुबह उठा तो आदतन सबसे पहले फोन चैक किया... RIP... RIP... कई मैसेज थे... व्हाट्सएप चैक किया तो यकीन नहीं हुआ... Shivam sannu chhadd gaya.... नवल सर का मैसेज था... कब कहां कैसे... कितने सारे सवाल थे... एक रात का फासला क्या इतना बड़ा हो सकता है कि एक दोस्त हमेशा के लिए जुदा हो जाए... समझ नहीं आ रहा था कि कैसे... नवल सर को फोन किया... सर की आवाज़ भर्राई हुई थी... सिर्फ इतना ही समझ आया कि कैथल के पास एक्सीडेंट हुआ... कैथल के पास... मेरे शहर के पास... ऐसे कैसे... बहुत से सवाल थे जो ज़हन में थे... कैथल में पत्रकार दोस्त जोगिंदर कुंडू से बात हुई.... वो सिविल अस्पताल में थे... घर पर फोन मिलाया... बड़े भाई से बात हुई... उन्हें वही सब बताया जो मुझे पता था... शिवम के साथ जुड़ी तमाम बाते ज़हन में घूम रही थी... आज भी वैसे ही याद हैं... अपने तकरीबन 9 साल के करियर में बहुत सी हस्तियों का अंतिम संस्कार हमने अपने दर्शकों को दिखाया... पर शिवम... मुझे बार बार कमांड मिल रही थी कि मैं कुछ बोलूं... कुछ कहूं.... पर अंदर बहुत कुछ टूट चुका था... उस दिन मैने एक ही दुआ ऑन स्क्रीन की थी.. कि इस तरह से किसी ओर को कभी भी दुबारा किसी अपने की मौत पर कुछ कहना ना पड़े... मेरे पास शब्द नहीं थे... सिर्फ भावनाएं थी... शिवम के साथ जुड़ी यादें थी.... उसकी मुस्कुराहट थी... हादसे के कुछ दिन बाद घर जाना हुआ तो एक ही बात ज़हन में थी... एक बार शिवम के घर जाना है... बड़े भईया और मैं हम दोनों गए... वहां जाकर मुझे पहली बार ये पता लगा कि शिवम इंजीनियरिंग स्टूडेंट था... एक बेहतरीन कलाकार था... अपने आस पड़ोस में सबका चहेता था... चंडीगढ़ में शिवम के घर से मैं और भईया वापिस आ गए... एक साल बीत गया है... पर उस घर और शिवम के चाहने वाले तमाम लोगों के ज़हन में उसके जाने से पैदा हुई खला अभी भी जस की तस है.. शायद कभी कम भी ना होगी... उसकी यादें... बातें... अंदाज़... हमेशा साथ रहेंगे... वो जहां भी है... मुस्कुराता रहे... RIP शिवम !
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कुछ लोग कम वक़्त मैं ही अपनी अमिट छाप छोड़ जाते हैं...ये घटना मुझे अच्छी तरह याद है. बेहद दुखद मगर हम नियती के आगे विवश हैं.
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