दुनिया भर में पेरिस में हुए आतंकी हमले में मृत लोगों को श्रद्धांजलि दी जा रही है... आतंकी संगठन आईएसआईएस के खिलाफ कई मुल्कों ने एक साथ मिलकर आतंक को जवाब देने की बात कही है... पेरिस में राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद आने वाले 3 महीनों के लिए आपात काल की घोषणा कर सकते हैं... इन तमाम खबरों के बीच पाकिस्तान में मीडिया में एक अलग विषय पर भी बहस जारी है... तहरीक ए तालिबान के नेता इमरान खान की दूसरी शादी के 8 महीने बाद तलाक की वजूहात क्या रही... दरअसल इमरान की दूसरी बीवी रहम खान ने कुछ एक बातचीत के दौरान इमरान खान के रवैये को लेकर बयान दिए... जिससे सारा मामला गरमा गया... खैर दुनिया में तो काफी कुछ हो रहा है... पर आज कुछ और बात करते हैं... आपको पता है हम हिन्दुस्तानी दुनिया से आगे कैसे निकल जाते हैं... एक जुमले के सहारे... नहीं नहीं यहां मैं चुनावी या राजनीतिक जुमलों की नहीं बल्कि ऐसे जुमलों की बात कर रहा हूं जो कितनी भी मुश्किलों में होने के बावजूद भी आपके लिए उम्मीद की किरण बन जाते हैं... मसलन... टेंशन मत ले यार ! ये एक ऐसा तकिया कलाम बना है... जिसे जब जहां चाहे जो चाहे इस्तेमाल कर सकता है और आपको एक संबल मिल जाता है....। फिर बात चाहे घर का बजट गड़बड़ाने पर मियां बीवी की बातचीत की हो... या स्कूल या कॉलेज एग्ज़ाम में कम नंबर आने पर मां बाप के गुस्से के सामने पेश होने वाले बच्चों की... ऑफिस में गुस्से में बैठे बॉस का सामना करना हो या ज़रूरी काम से जा रहे दोस्त की आपकी गलती से मिस हुई ट्रेन पर उसे समझाना हो... हर जगह बस एक ही बात आपको ज़्यादा तो नहीं पर कुछ एक हद तक कूल कर ही देती है... टेंशन मत ले यार ! हालांकि ये देखने वाली बात है कि जो शख्स आपको इस लाईन के ज़रिए समझाने की कोशिश कर रहा है... वो खुद कितना सक्षम है.... जैसे मान लीजिए घर में बीवी से किसी बात को लेकर तकरार हो गई... और आपका बच्चा आपके पास आकर कहे... ओह पापा... टेंशन मत लो... सोचिए, वो बेचारा तो खुद मां के हाथों दिन में कितनी बार पिटा होगा... पता नहीं...पर हां आपको कुछ देर के लिए एहसास करवा देगा... कि आपकी टेंशन खत्म... किसी गुस्से वाले अधिकारी के सामने जाने से पहले अगर आपका मातहत ही आपको कहे... सर जी टैंशन मत लो... कोई बात नहीं... या ज़िंदगी में हम खुद भी कितनी बार इस बात को कहते रहे हैं... कितनी ही बार पेपर्स में नंबर कम आए तो... शुरु में तो बेशक खूब डांट खाई पर बाद में मम्मी-पापा को यही कहा... अरे कोई बात नहीं.... टेंशन मत लो... (वो अलग बात है कि साल दर साल ना तो हमारा प्रदर्शन मां बाप की उम्मीदों की कसौटी पर खरा उतरा, और ना ही उन्होंने टेंशन लेना बंद किया)... पर जुमला यही है... टेंशन मत लो... इस जुमले में आखिर ऐसा है क्या कि पहाड़ सी मुसीबत भी कभी कभी तो राई का दाना लगने लगती है... कभी सोचा आपने... एक मशहूर लेखिका हैं रॉन्डा बायरन... उन्होंने मानवीय स्वभाव और उसके प्रभाव पर एक बहुत अच्छी किताब लिखी Secret... इस किताब में रॉन्डा लिखती हैं कि हम में से हर कोई एक दोहरे ट्रांसमीटर की तरह काम करता है... यानि तरंगे पकड़ता भी है और छोड़ता भी है... ये तरंगे... हमारे विचार हैं... यानि जैसा आप सोचेंगे वैसा ही आप बाहर के वातावरण में छोड़ेंगे... पर आगे वो लिखती हैं कि जैसा आप वातावरण में छोड़ेंगे वही घूम कर आपके पास आएगा.... जैसे अगर आप सकारात्मक और नकारात्मक दोनों सोच के लोगों से अगर मिले हों तो आपको पहली ही मुलाकात में इस बात का एहसास हो जाएगा... कुछ लोगों के पास बैठने से ही आपको कोफ़्त होने लगती है... जबकि कुछ लोगों की कम्पनी आपको बेहद पसंद आती है... ये उन लोगों की तरंगों का असर है... और साथ ही अगर मैं ये कहूं कि आपकी तरंगों का असर भी ऐसा ही होता है... तो गलत नहीं है... धार्मिक स्थलों पर शांति और जेल में या ऐसी ही दूसरी अपराध वाली जगहों पर अशांति होने की वजह वहां की ये तरंगे ही होती हैं... हमारी सोच हमारे आस पास का माहौल बनाती है... हमारी सोच हमारा व्यक्तित्व बनाती है... जैसा सोचते जाएंगे... वैसे आप बनते जाएंगे... और उसी तरीके से आपको समाज में स्वीकारा जाएगा... ये बात आज इसीलिए क्योंकि दुनिया भर में जिस आतंक से लड़ने की बात की जा रही है... उसके खिलाफ जंग भी एक विचार से ही शुरु होगी... एक ऐसा विचार जो मानवता के हित में होगा.. जो पूरी दुनिया के लिए होगा... जो इंसानियत से प्यार करने वाले हर शख्स के लिए होगा... और ऐसा विचार सिर्फ सरकारों के प्रतिनिधि या ऐसे ही कुछ गिने चुने लोग बना लें और काम हो जाए... ऐसा मुमकिन नहीं है... दुनिया का हर वो शख्स जो इंसानियत से मोहब्बत करता है उसे सोचना होगा आतंक के खिलाफ... वो तरंगे जो आपकी सोच से पैदा होंगी वो रास्ता तैयार करेंगी आतंक से जीत का... करगिल का युद्ध आप में से ज़्यादातर को याद होगा... हमारे सैनिक तराई में थे... दुश्मन ऊंची चोटियों पर... लड़ाई हुई तो पूरा देश एक हो गया... देश में देशभक्ति की भावना का ज्वार था... हर जगह सैनिकों के साथ आम नागरिक खड़े हो रहे थे... सभी ने एक ही सोच रखी... दुश्मन को धूल चटाओ... और नतीजा... हमारे वीर योद्धाओं ने जीत हासिल की... सोच... दुनिया में बदलाव ला सकती है... और इसीलिए आज ज़रूरत है कि हम इसी सोच के साथ पेरिस में दुख में डूबे अपने दोस्तों को कहें... टेंशन मत लो... हम हैं.. तुम्हारे साथ..। आइए आतंक की सोच और उसकी तस्वीर को खत्म करें।
गगन दीप चौहान
@kanwargagan
गगन दीप चौहान
Awesome
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