आंसू आग तूफान या धुआँ हूँ मैं
मुझमे उतर के देख तू क्या हूं मैं
तू जो सोचता रहा तेरा वहम था
मुझसे मिलके जान ले क्या हूं मैं
ख्वाब तेरे आसमां के पार जाते
ज़मीं पे हकीक़त की इंतेहा हूं मैं
ईमान की ज़मीं सादगी का करम
ऐसे मुल्क से गुज़रती हवा हूँ मैं
जो मौसम मोहब्बत जवाँ करे है
उसी रुत कोई गुल खिला हूँ मैं
उससे क्या मेरी हदें पूछते हो
गगन क्या जाने कि क्या हूँ मैं
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