Monday, October 8, 2018

वक्त

होंगी जागीरें या रहेगा फकीर
कैसे बोलेगी ये हाथों की लकीर
ऐसे लोगों को सब करें हैं सलाम
जो संवारें हैं बिगड़ी सी लकीर
सिर्फ किस्मत पे भरोसा ना कर
ज़ोर ए मेहनत से बदल दे तकदीर
जिन्हें होना था राजा, बन को गए
उस विधाता की कैसे पलटी लकीर
ज़िक्र ना इल्म का जिनके हाथ में था
देव की वाणी को दे गए वो नज़ीर
हाथ हाथों में उसने थाम लिया
फिर दिलों की मिल गयी थी लकीर
उठ गगन दिल में हौसला तो कर
देख वो कैसे बदलेगा तस्वीर

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