कट जाए अगर तो फिर ग़म क्या है
तू उलझ गई ये शिकायत है ज़िन्दगी
वो मिले तो आधी अधूरी चाहत जैसे
ये किस दौर की मोहब्बत है ज़िन्दगी
उसे दिल में उतरना अच्छे से आता है
ये तो कोई और ही दस्तक है ज़िन्दगी
हवा है खुशबू है बहार है मौसम भी है
मेरे लिए ही क्यों पतझड़ है ज़िन्दगी
बादल उसकी आँखों से बरसते हैं गगन
उसके लिए अधूरी सी हसरत है ज़िन्दगी
गगन
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