Saturday, February 3, 2018

वैलेन्टाईन

चाँद
छत के उस पार
बादलों के छज्जे पर
जमीन
मेरे पांवों के नीचे 
फासला बड़ा है
दोनों के बीच
दूरियाँ प्यार बढ़ाती हैं
तारे ले जाते हैं पैग़ाम
हवाएं तो बस
इधर की उधर
उधर की इधर
करने में मसरूफ
ये गुलाब की खुशबू
तुमने भेजी होगी
मिठास से लबरेज़
कड़वाहट से परहेज़
कांटे भी नहीं है
फूल तोड़ने का पाप भी नहीं
इस खुशबू के ज़रिए
आओ मना लें
वैलेंटाइन
तुम चाँद पर
मैं ज़मीन पर!
गगन

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