Saturday, February 3, 2018

आसमान, धूल और बरखा

आसमान एक दिन
ज़मीन पर आया
संग हवाएं भी थी
धूल परेशान थी
सब रौंद कर पांव तले
जा रहे थे बिना रुके
आसमां को जाने क्या सूझी
हवा को किया इशारा
हवा ने धूल को उठाया
अपने संग घुमाया
लहरना नाचना सिखाया
धूल को अहसास हुआ
ताकतवर होने का
रौंदने वाले पांवों की
आंखों में जा चुभी
आंखे परेशान, पूछें सवाल
रौंदा पांवों ने, तो हम पर हमला क्यूँ
भूल गई थी शायद
सिस्टम में टाॅप फ्लोर पर हैं
प्रदर्शनकारियों के पत्थर
ऊपर को ही आते हैं
आंखों ने देखा ऊपर
बड़ा सा आसमान
नीचे पांव, सबसे नीचे धूल
बीच में सारा जहान
गुहार लगाई कुछ तो करो
आसमान ने देखा
धूल की हवा खराब
ज़ोर-शोर से चिल्लाती धूल
आसमान पर भी उठा रही उंगलियां
अपने बराबर का बता रही
आसमान को, सुन रही खामोश हवा
आसमान ने देखा सुना महसूस किया
धूल का नखरा
बादल बच्चे को किया इशारा
आ गई बरखा
दिखा दिया धूल को आईना
- गगन

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