जाग कर भी ना जाने क्यूं वो सोया हुआ सा है..
सब कुछ हासिल है पर वो कुछ खोया हुआ सा है...
मुझसे बात करे तो तब, जब लफ्ज़ उसका साथ दें...
दूर होकर उसने भी आंखों को भिगोया हुआ सा है....
सच कहने की हिम्मत वो कभी कर ही नहीं सका...
झूठ उस शख्स की नस नस में पिरोया हुआ सा है...
मुझे धोखा दे कर, कैसे वो भरोसे की तवक्को करे है...
दूसरों के लिए गड्ढे खोदने वाला खुद उसमें गिरे है...
सब कुछ हासिल है पर वो कुछ खोया हुआ सा है...
मुझसे बात करे तो तब, जब लफ्ज़ उसका साथ दें...
दूर होकर उसने भी आंखों को भिगोया हुआ सा है....
सच कहने की हिम्मत वो कभी कर ही नहीं सका...
झूठ उस शख्स की नस नस में पिरोया हुआ सा है...
मुझे धोखा दे कर, कैसे वो भरोसे की तवक्को करे है...
दूसरों के लिए गड्ढे खोदने वाला खुद उसमें गिरे है...
"गगन"
No comments:
Post a Comment