Monday, February 2, 2015

विद्या पढाई की कसम....


बिस्तर झाड़ते हुए अचानक ही बिटिया की प्ले स्कूल की नोटबुक पलंग से नीचे गिर गई। अपने नन्हे से हाथों में बड़ी सी नोटबुक को उठाकर छोटी सी मैम ने आदेश दिया जल्दी से मत्था टेको, सॉरी बोलो, नहीं तो आपको विद्या पढाई नहीं आएगी.... उसकी बात सुनकर हंसी भी आई.. और बचपन के वो दिन भी याद आए जब पार्क में अलग से हरे पौधे की पत्तियों को विद्या पढाई का स्रोत मानकर किताबों में कापियों में रखा करते थे। मुझे नहीं पता कि आप में से कितनों ने उस हरे पौधे को देखा होगा। पर अब जब पढाई के रस्मो रिवाज़ से नाता टूटे एक लंबा वक्त हो गया है तकरीबन 8 साल हो गए हैं.... क्या करूं..... क्या बेटी को बता दूं कि विद्या पढाई जैसी कोई ऐसी चीज़ नहीं होती जो किताबों को मत्था टेककर ही आए या फिर किताबों में हरी पत्तियां रखने से.... या फिर उसके मासूम बचपन को अपनी दुनिया में खुश रहने दूं और उसके मासूम आदेशों को मानकर उसकी नोटबुक को मत्था टेक ही लूं।

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