क्योंकि एक नुक्ते का फ़र्क फूल को फ़ूल बना देता है...
Tuesday, August 11, 2015
तो क्या
...
क़तरे से समंदर जो ना हो सके तो क्या खुद के साथ खुदा को ना भिगो सके तो क्या कुछ दूर तक तो साथ रहे, गुफ्तगू हुई.. कंधे पे सर रख कर जो ना रो सके तो क्या... दुश्मनी तो उससे दोस्ती से बढकर थी... बेवफाई में मशहूर ना हो सके तो क्या गगन
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