Tuesday, September 17, 2024

उसकी आवाज़

मैं सुनना चाहता था तुम्हें 
कुछ ऐसे 
कि बस 
तुम कहती रहो 
और मैं सुनता रहूं 
इंतजार कुछ सालों का था 
जो सदियों सा लग रहा था 
और फिर 
मैंने तुम्हें सुना 
जैसे सुनाई देती है 
रेगिस्तान में बारिश की आवाज 
जैसे घने जंगल में सुनाई देता है 
कुदरत का संगीत 
जैसे पूरी खामोशी में 
आपका दिल आपसे करता है बात 
कुछ ऐसे ही 
मैंने सुना तुम्हें
 एक अरसे के बाद 
और हैरान हूं मैं 
कि कैसे 
तुमने संभाल कर रखी है 
अपनी आवाज में वह खनखनाहट 
जिसमें डूबा हुआ है 
इस पूरे जहान का संगीत

गगन

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