Thursday, August 23, 2018

वंशानुगत बीमारी

बंधन आज भी
वैसे ही हैं
जो तब थे
जब सफेद बाल भी
स्याह थे
विद्रोह तब भी थे
आज भी जारी हैं
भूखे रहना
तब भी प्रदर्शन था
आज भी
दर्द भरे गीत
तब भी अपनापन जताते थे
आज भी बजते हैं
एमपी3 में
लगातार
कंकरीट के जंगलों में
हवा तब भी ख़ामोश थी
आज भी मौसम
दम घोटे हुए है
सिसकियां आज भी
सिर्फ तकिये को सुनाती हैं
अपनी आवाज़
लाल आंखों की कहानी
बहाने बना रही है
हर सुबह के बाद
अपनों के साथ
जंग जीतने का विश्वास
आज भी कायम
दिल का तेज़ धड़कना
आज भी बदस्तूर जारी है
यह इश्क़ की
वंशानुगत बिमारी है

-गगन

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