Monday, July 2, 2018

तेरा जाना

खिड़की से तो चाँद निकलता कभी सुना था मैने ये
उसने झांका सूरज नज़रें नीची करके भाग गया
इक मुस्कान किसी की कैसे ले आती बहार यहाँ
उसके आंसू के कतरे से शहर समंदर पार गया
किसकी बोली कोयल को भी मीठी भाषा सिखलाए
उसकी चुप्पी से जीवन में तेज़ कोई तूफान गया
बहार की आमद होती जब भी उसका आना होता था
उसके जाने से पतझड़ का मौसम लगे पहाड़ हुआ
गगन भी चुप है, धरती चुप है, हवा ना कोई शोर करे
एक उसी की कमी से जग लगता जैसे शमशान हुआ

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