माना वो भी थोड़ा जवां है
आखिर को मेरा हमनवा है
बाल मेरे जो उड़ गए थोड़े
गोरे से हुआ वो गेहुंआ है
एजी ओजी का दौर खत्म
क्यों चिल्लाते हो, क्या है?
पांडुलिपियां* संभालें कैसे!
घर में महाभारत हुआ है
मन माफिक सुनता है वो
कर अनसुना जो मैंने कहा है
रूखी सूखी मिश्री लगे थी
वो बादाम को कहे चना है
एक डोर से बंधे दो जीवन
36 का बेशक आंकड़ा है
हक दोनों का दूजे पर पूरा
बेलन का निशां अभी रवां है
मिला था 'गगन' से दीप जहाँ
क्षितिज वो कोरी कल्पना है
गगन
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