Thursday, September 29, 2011

ऑल इज़ वैल

मुश्किल में थे मन्नू भाई... अरे क्या कहा मन्नू भाई को नहीं जानते.... डूब कर मत मर जाइए कहीं जाकर... जी हाँ सही पढा मत मरिएगा अगर आपको नहीँ पता मन्नू भाई के बारे में, क्योँकि मन्नू भाई के बारे में तो हम आपको बताएंगे... हमारे गाँव के सरपंच हैं... चलती बिचारोँ की तनिक भी नहीं... हँ पढे लिखे ज़रूर अव्वल दरज़े के हैँ लेकिन पढे लिखे मूरखों॥ मेरा मतलब है तथा कथित बुद्धिजीवियों की कोई कमी थोड़ी है हमारे गाँव में... एक को अवाज़ लगाओ हज़ारोँ तैयार.... खैर बात हो रही थी मन्नू भाई की परेशानी की... मुश्किल ये थी कि उनका जन्म दिन था... अरे जन्मदिन होना मुश्किल नहीं... भई सब्र कीजिए मन्नू भाई आप और हम जैसे ही हैं तो जन्म दिन तों होना ही है... अवतार थोड़ी होगा.... हाँ सुनिए... मन्नू भाई का जन्म दिन और बिगड़ गए पुन्नू काका... हाँ हाँ वही मंदिर के पास वाले बगीचे में जो रखवाली करते हैँ दिन रात... बिचारे काका आँखें इतनी कमज़ोर हो गई हैँ कि नाक से बड़ा चशमा लगवाना पड़ा... अब नाक और चश्मे का क्या मेल... भई हमें मालूम है... कोई मेल नहीं लेकिन पुन्नू काका को देखकर आपको सब समझ आ जाएगा... हंसिएगा मत नहीं तो काका भड़क जाएंगे... इस भड़कने की वजह बने चड्डी चाचा... भई पुन्नू काका और चड्डी चाचा के बीच लड़ाई हुई बीस रुपए के लेन देन को लेकर.... क्या कहा सिर्फ २० रुपए अरे हुज़ूर ये सिर्फ २० रुपए नहीं बहुत बड़ी रकम है हमारे गाँव के लिए अब ये गाँव है कोई दिल्ली नहीं जहाँ कई हज़ार करोड़ का काम हो... खैर पुन्नू काका और चड्डी चाचा की लड़ाई पहुंची मन्नू भइया के दरबार तो परेशान तो होना ही था.... फिर.... फिर कमरे में तीनों को बिठाकर शन्नो ताई ने वो किलास लगाई कि बस पूछो ही मत.... अब शन्नो ताई के बारे में भी आपको बताना पड़ेगा अरे हमने बताया ना कि मन्नू भाई की नही चलती... यहाँ चलती है शन्नो ताई की.... ये हैं कौन... अरे ज़्यादा सवाल मत पूछा करो दोस्त तबीयत बिगड़ जाएगी और फिर से मन्नू भाई का मूड़ बिगड़ जाएगा। तो कुल मिलाकर बात यहाँ खत्म हुई कि तीन घंटे तक लगी किलास के बाद मन्नू भइया हंसे और फिर चड्डी चाचा और पुन्नू काका ने भी हाथ मिला ही लिए.... इकट्ठे ही आवाज़ लगाई शन्नो ताई ऑल इज़ वैल.................

No comments:

Post a Comment